ashwagandha benefits in hindi

About Ashwagandha Benefits in Hindi: सम्पूर्ण विश्व में भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जहाँ पर एक से बढ़कर एक गुणकारी औषधियां पाई जाती हैं। जिन बीमारियों का इलाज देश-विदेश की एलोपैथिक दवायें नहीं कर पाती उन बीमारियों का इलाज देशी औषधियों द्वारा किया जाता है। कई बार देखा जाता है कि व्यक्ति अपनी बीमारी को ठीक करने के लिए एलोपैथिक में लाखो रूपए खर्च करके अपना इलाज़ करवाता है और फिर भी उसे अपनी बीमारी से मुक्ति नहीं मिलती है। तब वह थक-हारकर देशी औषधि को अपनाता है। देशी औषधि के सेवन से धीरे-धीरे व्यक्ति की बीमारी ठीक हो जाती है। देशी औषधियों से बीमारी को ठीक करने में समय अवश्य लगता है लेकिन देशी औषधियों के सेवन से बीमारियां जड़ से ख़त्म हों जाती हैं। इसलिए आज हम आपको भारत में पाई जाने वाली एक ऐसी औषधि के बारे में बताने वाले हैं जिसका इस्तेमाल करके आप कई प्रकार के रोंगो से मुक्ती पा सकतें हैं। हम जिस गुणकारी औषधि की बात कर रहे है उसका नाम अश्वगंधा (Ashwagandha) है।

 

अश्वगंधा क्या है | What is Ashwagandha in Hindi

अश्वगंधा एक बहुत ही मत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी है जिसे आयुर्वेदिक डॉक्टरों द्वारा अपनाया गया है। अश्वगंधा नाम दो शब्दों से मिलकर बना है अश्व + गंधा जिसका अर्थ है घोड़े जैसी गंध, अर्थात कहा जाता है कि अश्वगंधा के पत्तों एवं जड़ में से अश्व के मूत्र जैसी गंध आती है इसलिए इसको अश्वगंधा कहते हैं। इस जड़ी बूटी के संबंध में एक और तथ्य यह भी है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से इस जड़ी बूटी का सेवन करता है उसमें घोड़े जैसी ताकत आ जाती है। अतः 50 वर्ष की उम्र वाला व्यक्ति 25 वर्ष जैसी ताकत रखता है। तो ऐसी चमत्कारी औषधि अश्वगंधा का नाम सुनते ही आपके मन में यह विचार अवश्य आ रहा होगा की अश्वगंधा क्या है कैसी दिखती है, इसका उपयोग कैसे किया जाता है। आपके सभी प्रश्नों का समाधान करने के लिए आज हम आपको अश्वगंधा के बारे में विस्तार से बतातें हैं।

 

अश्वगंधा के बारे में विस्तृत जानकारी | Detailed Information about Ashwagandha in Hindi

अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। अश्वगंधा का पौधा एक चमत्कारी पौधा है जिसकी विश्वभर में लगभग 10 प्रजातियां पाई जाती हैं किन्तु भारत में अश्वगंधा की मुख्य रूप से दो ही प्रजातियां पाई जाती हैं। इस पौधे की एक प्रजाती को छोटी अश्वगंधा तथा दूसरी प्रजाती को बड़ी अश्वगंधा कहा जाता है। छोटी अश्वगंधा की झाड़ी छोटी होती है किन्तु इसकी जड़ बड़ी होती हैं इसलिए इसको छोटी अश्वगंधा कहा जाता है। सर्वाधिक रूप में छोटी अश्वगंधा राजस्थान के नागौर में पायी जाती है इसलिए इसको नागौर अश्वगंधा भी कहते हैं। यदि बात करें बड़ी अश्वगंधा की तो इसकी झाड़ी बड़ी होती है परन्तु इसकी जड़ छोटी और पतली पाई जाती है। अश्वगंधा की पत्तियां कोमल, अण्डाकार, रोमयुक्त होती हैं। अश्वगंधा भारत के आलावा पाकिस्तान, श्रीलंका, अफ्रीका, अमेरिका आदि देशों में पायी जाती है। भारत के मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों में अश्वगंधा का सर्वाधिक उत्पादन किया जाता है।

 

अश्वगंधा कैसा दिखता है | What does Ashwagandha look like?

ashwagandha plant

प्रचीन समय से ही आयुर्वेदिक दवाओं में अश्वगंधा की जड़ी-बूटी का इस्तेमाल किया जाता रहा है। अश्वगंधा का पौधा 1.2 मीटर लगभग (10 -12) सेंटीमीटर लम्बा होता है। इसके पत्ते 2-4 इंच लम्बे एवं 1-2 इंच चौड़े होते हैं। अश्वगंधा का फूल हरे, पीले रंग का होता है जो की पांच के समूह में रहता है। अश्वगंधा का फल बेर की भांति होता है जो पकने के पश्चात लाल रंग का दिखाई देता है। इसकी जड़ बाहर से भूरी और अंदर से सफ़ेद सख्त एवं डेढ़ फ़ीट लम्बी होती है।

 

अश्वगंधा के विभिन्न नाम | Some other names of Ashwagandha

अश्वगंधा को अलग अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। आइये जानते हैं अन्य भाषाओं में अश्वगंधा को किस प्रकार के नामों से जानते हैं।

1. अश्वगंधा का वैज्ञानिक नाम (वानस्पतिक नाम) – विथानिया सोमानिफेरा

2. अश्वगंधा का उर्दू नाम- असगंधनागोरी

3. अश्वगंधा का संस्कृत नाम – कुष्ठगन्धिनी, वरदा, वराहकर्णी

4. अश्वगंधा का गुजराती नाम – घोडासोडा, आसन्ध

5. अश्वगंधा का तमिल नाम – अमुक्किरा

6. अश्वगंधा का पंजाबी नाम – असगंद

7. अश्वगंधा का अंग्रेजी (इंग्लिश) नाम – विंटर चेरी, पॉयजनस गूज्बेर्री

8. अश्वगंधा का नेपाली और बंगाली नाम – अश्वगन्धा

9. अश्वगंधा का तेलगु नाम – पनेरु

10. अश्वगंधा का कन्नड़ नाम – आसांदू

 

अश्वगंधा के गुण | Qualities of Ashwagandha in Hindi

अश्वगंधा की जड़ को औषधी के रूप में प्रयोग किया जाता है इसलिए इसको जड़ी बूटी कहा जाता है। अश्वगंधा की जड़ शुष्क वर्धक, बलपुष्टिदायक, रसायन, कड़वी, कसैली, गर्म, वात – कफ, शोथ, क्षय तथा श्वेतकुष्ठ को नष्ट करने का गुण इस जड़ी बूटी में पाया जाता है। अर्थात अश्वगंधा शरीर को हष्ट-पुष्ट बनाने वाली गुणकारी औषधी है।

 

अश्वगंधा के रासयनिक संघटक | Chemical Ingredient of Ashwagandha

अश्वगंधा की जड़ में कसेविग्रिने, अनहैगरिने, ट्रोपीन, एनाफैरीन, स्यूडोट्रोपीन आदि रासयनिक गुण पाए जाते हैं। इसके रासयनिक प्रभाव के कारण शरीर को बल मिलता है तथा शरीर की शुष्क दुबर्लता दूर होती है। इसका रासायनिक गुण श्वांस रोग, रक्तभार में भी लाभदायक होता है।

 

अश्वगंधा के चमत्कारी फायदे | Ashwagandha Benefits in Hindi

अभी हमने अश्वगंधा के बारे में जाना की यह क्या होता है, कैसा देखता है और इसमें क्या क्या गुण मौजूद हैं। चलिए अब आपको अश्वगंधा के चमत्कारी फायदों से परिचित करवाते हैं।

 

1. जोड़ों के दर्द के लिए है रामबाण औषधि | It helps in Joint pain

अश्वगंधा में अनेक गुणकारी विटामिन्स व पौष्टिक पोषक तत्व पाये जाते हैं। इसलिए अश्वगंधा केवल एक बीमारी का इलाज नहीं करता बल्कि अश्वगंधा के द्वारा अनेक बीमारियों का इलाज किया जाता है। इन्ही बीमारियों में से एक है जोंडो का दर्द। जोड़ों का दर्द की समस्या कई लोगों को रहती है परन्तु बता दें की इसे गंभीरता से लेना जरूरी है। जैसा कि हम जानते है की यदि किसी व्यक्ति को शरीर के किसी भी भाग में दर्द है तो वह कोई भी कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर पाता क्योंकि दर्द के कारण मानसिक अस्थिरता उत्पन्न होती है। जोड़ों के दर्द को ख़त्म करने के लिए अश्वगंधा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाओं में प्राचीन समय से ही किया जा रहा है। विश्व विख्यात बाबा रामदेव भी जोड़ो के दर्द में अश्वगंधा गोली या चूर्ण खाने की सलाह देते हैं। आइये आपको बताते हैं जोड़ो के दर्द से राहत पाने के लिए अश्वगंधा का प्रयोग किस तरीके से करना चाहिए।

विधि –

  • सर्वप्रथम अश्वगंधा की जड़ बाजार से लें आएं।
  • अश्वगंधा की जड़ो को महीन पीसकर चूर्ण बना लें और इसे काँच के डिब्बे में भरकर रख लें।
  • एक चम्मच अश्वगंधा के चूर्ण को आधे कप दूध में मिलाकर प्रतिदिन सुबह शाम सेवन करें।
  • छह महीने तक लगातार सेवन करने से जोड़ों का दर्द जड़ से ख़त्म हो जाएगा।

ध्यान रहे – अश्वगंधा चूर्ण का इस्तेमाल करते समय मैदा, बेसन और खट्टी चीजों का सेवन करना निषेध रहता है।

 

2. अश्वगंधा करता है कैंसर से बचाव | Ashwagandha helps to fight cancer

हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक शोध के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि अश्वगंधा में एंटी-ट्यूमर गुण पाया जाता है। जो की ट्यूमर कीटाणुओं को उत्पन्न होने से रोकता है। अश्वगंधा कीमोथेरेपी के नकारात्मक प्रभाव को नष्ट कर देता है। जिसकी वजह से कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है। इसके आलावा अश्वगंधा रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज बनाने का कार्य भी करता है जिससे कैंसर सेल एपोपोस्टसिस का सामना नहीं कर पाते और वह ख़त्म हो जाते हैं।

 

3. थॉयराइड ग्रंथि के कारण होने वाले प्रभावों को रोके | Prevent effects caused by thyroid gland

अश्वगंधा थायराइड़ ग्रंथि के रोग के कारण शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव को रोकती है। थायराइड ग्रंथि के रोग को रोकने के लिए 2 ग्राम अश्गंध चूर्ण, 8-10 तुलसी के पत्तो का सेवन सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ करें। इस प्रक्रिया के इस्तेमाल से थॉयराइड ग्रंथि का प्रभाव शरीर के अन्य भागों पर नहीं पड़ता है।

 

4. मानसिक कमजोरी और अनिद्रा का करे अंत | End mental weakness and insomnia

अश्वगंधा से शरीर के अंगो की मांसपेशियों को शक्ति मिलती है। अश्वगंधा मस्तिष्क और मांसपेशियों के मध्य सकारात्मक समन्वय बनाकर मानसिक कमजोरी को दूर करता है। जैसा की हम सभी जानते हैं कि अधिक काम की वजह से आजकल हर किसी को मानसिक तनाव सर्वाधिक रहता है। जिसकी वजह से उन्हें नींद भी ठीक से नहीं आती है। अश्वगंधा के चूर्ण में कोर्टिसोल के स्तर को कम करने का गुण पाया जाता है जो मानसिक तनाव को कम करके अच्छी नींद प्रदान करता है।

सामग्री –

  • 100 ग्राम जटामांसी चूर्ण।
  • 100 ग्राम अश्वगंधा का चूर्ण।
  • 100 ग्राम ब्राम्ही का चूर्ण।
  • दूध।

मात्रा और सेवन की विधि –

अश्वगंधा चूर्ण, जटामांसी चूर्ण, ब्राम्ही चूर्ण को मिलकर कांच के डिब्बे में भरकर रख लें। यह प्रातः एवं रात में 2 ग्राम चूर्ण दूध के साथ लें। इस प्रयोग को करने से कमजोरी दूर होती है व निद्रा सामान्य होने लगती है।

 

5. केश समस्या को सुलझाए | Ashwagandha solve hair problem

कमजोरी, प्रदुषण और बाज़ार में उपलब्ध कैमिकल युक्त प्रोडक्ट के इस्तेमाल से बाल झड़ने लगते हैं। बाल झड़ने की समस्या दिन- प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। प्रत्येक वर्ग इस समस्या से पीड़ित है और इससे निजात पाना चाहता है। आपको जानकार हैरानी होगी की इस समस्या का निदान अश्वगंधा में है। अश्वगंधा में टाइयरोसीन पाया जाता है जो मेलेनिन के उत्पादन को सक्रीय करता है। जिससे बाल लम्बे, घने और मजबूत बनते हैं।

सामग्री –

  • 200 ग्राम त्रिफला का चूर्ण।
  • 200 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण।
  • 200 ग्राम भृंगराज चूर्ण।
  • 200 ग्राम तिल्ली चूर्ण ।

मात्रा और सेवन विधि –

ऊपर बताये गए सभी चूर्ण को सामान मात्रा में मिलाकर कांच के डिब्बे में भरकर रख लें। अब इस चूर्ण का आधा चम्मच पाउडर लेकर रोज सुबह दूध के साथ सेवन करें। इसके इस्तेमाल से बाल झड़ना बंद हो जाते हैं। इसके आलावा सफ़ेद हुए बाल भी पुनः काले हो जाते हैं।

 

6. खून की कमी को करे दूर | Ashwagandha helps to overcome anemia

सामान्य तौर पर महिलाओं में खून की कमी को देखा जाता है। अतः सभी व्यक्तियों में खून की सामान्य मात्रा का होना आवश्यक है। खून की कमी से व्यक्ति कमजोरी, शारीरिक थकान, मानसिक थकान आदि बिमारियों का अनुभव करता है। खून की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। अश्वगंधा के सेवन से खून बढ़ता है अतः अश्वगंधा से खून की कमी दूर हो जाती है।

सामग्री –

  • 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण।
  • 250 मिलीग्राम स्वर्ण मासिक भस्म।
  • 250 मिलीग्राम ताप्यादी चूर्ण।
  • 250 मिलीग्राम धात्री लौह।

सेवन विधि –

सभी सामग्री को ठीक प्रकार से मिलाकर अनार के रस के साथ सेवन करने से शरीर का रक्त बढ़ने लगता है।

 

7. चर्बी कम कर मोटापे को करे नियंत्रित | Control obesity by reducing fat

संतुलित खान-पान नहीं करने की वजह से शरीर की चर्बी और मोटापा बड़ जाता है। कई बार भूख से अधिक खाने के कारण भी वजन बढ़ जाता है। शरीर की चर्बी और मोटापा शरीर की क्रियाओ को असंतुलित कर देता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए मोटापा पर नियंत्रण करना अति आवश्यक है। अश्वगंधा के चूर्ण में एक ऐसा तत्व पाया जाता है जिससे मानव को भूख कम लगती है। आपको बता दें की अधिक तनाव की वजह से भी वजन बढ़ता है अतः अश्वगंधा तनाव को भी कम करता है।

सामग्री –

  • 100 ग्राम सफ़ेद मूसली।
  • 100 ग्राम काली मूसली ।
  • 100 ग्राम अश्वगंधा ।

सेवन की करने की विधि –

ऊपर बताई गई सभी सामग्री को बराबर मात्रा में लेकर महीन पीसकर एक साफ़ डिब्बे में भरकर रख लें। सुबह खाली पेट इस चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा का सेवन गर्म पानी के साथ करें। इस चूर्ण के कुछ ही दिनों के सेवन से शरीर की चर्बी और मोटापा कम हो जाता है।

 

8. ह्रदय रोग में है लाभकारी औषधि | Health benefits of ashwagandha in hindi

वर्तमान दौर में ह्रदय रोग से सम्बंधित समस्याओं को सर्वाधिक देखा जा रहा है। अश्वगंधा में कार्डियो एपोप्टोसिस सेल्स को नष्ट करने का तत्व पाया जाता है जो की ह्रदय रोग में लाभ पहुँचता है। साथ ही अस्वगंधा मायोकार्डियम को पुनः जीवित कर देता है।

सामग्री-

  • अश्वगंधा की छाल का चूर्ण ।
  • अर्जुन की छाल का चूर्ण।

मात्रा और सेवन विधि –

आधी छोटी चम्मच अश्वगंधा की छाल का चूर्ण, आधी छोटी चम्मच अर्जुन की छाल का चूर्ण लें। दोनों चूर्ण को अच्छे से मिलाकर सुबह-शाम गर्म पानी या दूध के साथ सेवन करें।

 

9. कमर दर्द से पाएं मुक्ति | Get relief from back pain

कमर दर्द महिलाओं और पुरुषों में होने वाली एक सामान्य बीमारी है। कमर दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कमर में किसी प्रकार की चोट लग जाना, अधिक समय तक कुर्सी पर काम करना आदि। अश्वगंधा में आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो की कमर के दर्द को ख़त्म करने का काम करता है।

सामग्री –

  • तीन ग्राम अश्वगंधा चूर्ण।
  • दो ग्राम सफ़ेद मूसली चूर्ण।
  • दो ग्राम सौंठ पाउडर

मात्रा और सेवन विधि –

सभी सामग्री को ठीक तरह से मिला लें। तैयार मिश्रण को सुबह-शाम गर्म पानी के साथ सेवन करें। पंद्रह दिन के इस्तेमाल से ही कमर का दर्द कम होने लगता है।

 

10. स्तनपुष्टि के लिए है लाभकारी | Ashwagandha benefits for body in hindi

अश्वगंधा चूर्ण 2 ग्राम, 2 ग्राम शतावरी चूर्ण को मिलाकर एक साफ़ डिब्बे में भरकर रख लें। इस मिश्रण का सेवन शहद के साथ मिलाकर करें। मिश्रण को सेवन करने के पश्चात ताजा गाय का दूध पीएं। दो से तीन महीने के सेवन से ही स्तनों के आकार में वृद्धि होने लगती है। इस चूर्ण के उपयोग से शरीर भी मजबूत बनता है।

 

11. मासिक धर्म सम्बन्धी विकारों को करे दूर | It removes menstrual disorders

अक्सर महिलाओं को मासिक धर्म के समय अत्यधिक दर्द, कमजोरी महसूस होती है। जिसकी वजह से मासिक धर्म का समय बहुत ही मुश्किल से गुजरता है। अतः मासिक धर्म में अत्यधिक दर्द व तकलीफ होने की अवस्था में अश्वगंधा का सेवन लाभकारी होता है।

सामग्री-

  • 200 ग्राम अश्वगंधा पाउडर।
  • 200 ग्राम शक्कर पाउडर।

मात्रा और सेवन विधि –

अश्वगंधा और शक्कर को बराबर मात्रा में लेकर दोनों को मिलाकर कांच के डिब्बे में भरकर रख लें। तैयार मिश्रण की पांच ग्राम मात्रा सुबह गर्म पानी से खाली पेट सेवन करें।

ध्यान रहे – इस चूर्ण का उपयोग मासिक धर्म शुरू होने के लगभग एक सप्ताह पहले से करें। मासिक धर्म आने के बाद इस चूर्ण का सेवन बंद कर दें। इसके इस्तेमाल से मासिक धर्म में होने वाले दर्द से मुक्ति मिलती है।

 

12. प्रदर रोग में है लाभकारी | Ashwagandha is beneficial for women

महिलाओं में बहुत से रोग पाए जाते हैं उन्हीं रोगो में से एक प्रदर रोग है। प्रदर रोग जो की 75% महिलाओं में पाया जाता है जिसके कारण महिलाओं में बहुत अधिक कमजोरी आ जाती है। अतः स्त्रियों में कमजोरी के कारण उनका गर्भाशय भी कमजोर हो जाता है अतः श्वेत प्रदर व रक्त प्रदर में अश्वगंधा गुणकारी औषधी के रूप में कार्य करता है।

सामग्री –

  • 250 ग्राम शतावरी चूर्ण
  • 250 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण

मात्रा और सेवन विधि

शतावरी चूर्ण और अश्वगंधा चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से मिला लें। इस मिश्रण की तीन ग्राम मात्रा ताजे पानी के साथ सेवन करने से प्रदर रोग में लाभ होता है।

 

13. अश्वगंधा करे वातरोग को ठीक | Ashwagandha helps to cure gout

अश्वगंधा एक ऐसी औषधी है जिसके सही इस्तेमाल से अनेक प्रकार के गंभीर रोंगो को ठीक किया जा सकता है। वात रोग भी उन्हीं गंभीर रोगों में से एक है। यदि आप वात रोग से पीड़ित हैं तो अश्वगंधा के इस्तेमाल से आप वात रोग से छुटकारा पा सकतें हैं।

सामग्री –

  • 150 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण ।
  • 100 ग्राम मेथी (बारीक पीसी हुई)।
  • 200 ग्राम गुड।

विधि – अश्वगंधा चूर्ण, मेथी और गुड़ को मिलाकर 10 ग्राम के लड्डू बनाकर कर रख लें। सुबह-शाम ताजे दूध के साथ इन लड्डुओं का सेवन करें। कुछ ही दिनों के सेवन से वात रोग ठीक हो जायेगा।

ध्यान रहे – यदि किसी रोगी को मधुमेह रोग है तो वह लड्डू बनाने में गुड़ का सेवन ना करें।

 

14. अश्वगंधा से बढ़ाएं याददाश्त | Increase memory with Ashwagandha

जैसे-जैसे मनुष्य की उम्र बढ़ती जाती है उसकी याददाश्त कमजोर होने लगती है। सामान्यतः बुढ़ापे की अवस्था में तो याददाश बहुत ही कम हो जाती है। अश्वगंधा याददाश्त को बढ़ाने का कार्य करता है।

सामग्री –

  • 50 ग्राम पुनर्नवा चूर्ण ।
  • 50 ग्राम त्रिफला चूर्ण ।
  • 50 ग्राम जटामांसी चूर्ण।

मात्रा व सेवन विधि –

ऊपर बताई गई सभी सामग्री को बराबर मात्रा में मिलाकर साफ़ डिब्बे में भरकर रख लें। अब इस मिश्रण की दो ग्राम मात्रा का सेवन शहद के साथ सुबह के समय करें। यदि किसी व्यक्ति को शहद के साथ इस मिश्रण का सेवन नहीं करना है तो वह गाय के दूध में मिश्री मिलाकर सेवन कर सकता है।

 

15. असामान्य धड़कन को करें सामान्य | Heart benefits of ashwagandha in hindi

यदि किसी व्यक्ति की धडकन असामान्य या तेज हो तो अश्वगंधा चूर्ण और बहेड़ा चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर गुड़ के साथ मिला लें। तैयार मिश्रण को गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से धड़कन सामान्य हो जाती है।

 

16. योन क्षमता को बढ़ाने में मददगार | Ashwagandha increases capacity

वैज्ञानिक अध्यन में पाया गया है की अश्वगंधा में कामोद्दीपक गुण पाए जाते हैं जिन पुरुषों में योन क्षमता की कमी होती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर उन लोगों को अश्वगंधा खाने की सलाह देते हैं। अश्वगंधा के केप्सूल भी आते हैं जिसके सेवन से योन क्षमता व प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ वीर्य की गुणवत्ता में भी सुधर हो जाता है।

ध्यान रहे – योन व प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए अश्वगंधा या इसके केप्सूल का रोज रात को एक गिलास दूध के साथ एक केप्सूल का सेवन करना चाहिए।

 

अश्वगंधा इस्तेमाल करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान | Precaution before using Ashwagandha in Hindi

 

आइये जानते है अश्वगंधा के सेवन करने में क्या क्या सावधानी रखनी चाहिए और किसको इस औषधी का सेवन नहीं करना चाहिए अथवा किस व्यक्ति को अश्वगंधा का सेवन करने से नुकसान पहुंचा सकता है।

1. अश्वगंधा की तासीर गर्म होती है इसलिए गर्मी के मौसम में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

2. अश्वगंधा का सेवन लगातार चार महीने से अधिक नहीं करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को इसके सेवन से अधिक गर्मी लगे तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए।

3. यदि नींद कम या अधिक आने लगे तब भी अश्वगंधा का उपयोग करना बंद कर देना चाहिए।

4. पेट में गैस, उल्टी, दस्त या अन्य आंतो से सम्बंधित परेशानी हों तब भी अश्वगंधा का उपयोग नहीं करना चाहिए।

5. गर्वावस्था के समय डॉक्टर की सालह लेकर ही अश्वगंधा का सेवन करना चाहिए।

6. यदि आप ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने वाली दवाइयों का सेवन कर रहे हैं तो उस समय अश्वगंधा का सेवन ना करें। अश्वगंधा का उपयोग अन्य दवाइयों के साथ भी नहीं करना चाहिए।

7. अश्वगंधा का सेवन कभी किसी अन्य औषधि के साथ नहीं करना चाहिए। अश्वगंधा का अधिक मात्रा में सेवन करने से उल्टी, दस्त, पेट से सम्बन्धित अन्य बीमारियां हो सकती हैं।

8. कैंसर मरीजों को चल रहे इलाज के साथ-साथ डॉक्टर के परामर्श से ही अश्वगंधा का उपयोग करना चाहिए।

9. थायरॉइड से पीड़ित लोग थायरॉइड की टेबलेट के साथ ही अश्वगंधा का सेवन करें।

10. अश्वगंधा का उपयोग अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए या डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसका सेवन करें।

 

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तो दोस्तों ये थी अश्वगंधा से जुड़ी कुछ जानकारी (Information of Ashwagandha in Hindi)। हम आशा करते हैं की आपको अश्वगंधा के फायदे (Ashwagandha benefits in hindi) समझ आ गए होंगे। अगर आपको हमारी यह जानकारी पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के बीच शेयर जरूर करें और ऐसी ही जानकारी पड़ते रहने के लिए हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें।
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