इंतिज़ार करना वैसे तो किसी को पसंद नहीं पर ना चाहते हुए भी व्यक्ति को कभी ना कभी इंतिज़ार करना पड़ जाता है। किसी को अपने मेहबूब का इंतिज़ार रहता है तो किसी को अपनी गाड़ी का, किसी को नौकरी लगने का इंतिज़ार रहता है तो किसी को अपनी शादी का, अलग अलग व्यक्तियों के इंतिज़ार में अलग अलग राज छुपे होते हैं। ऐसे में आज हम आपके सामने इंतिज़ार के ऊपर लिखी कुछ शानदार शायरियां (Best intezaar shayari) पेश करने जा रहे हैं जो निश्चित ही आपको पसंद आएँगी।

intezaar shayari

इंतिज़ार शायरी – मूर्ख था जो मैंने इंतिज़ार किया 

उसने सिर्फ वादे किये झूठा प्यार किया
घमंड मैंने अपनी मोहब्बत पर बेवजह किया
वो तो भूल गयी, मानों हमारे बीच कुछ था ही नहीं
मूर्ख मैं था जो मैंने उसका इंतिज़ार किया…

Intezaar Shayari – Moorkh tha jo maine intezaar kiya 

Usne sirf vaade kiye jhootha pyaar kiya
Ghamand maine apni mohabbat par bewajah kiya
Wo toh bhool gayi, mano hamare beech kuch tha hi nahi
Moorkh mai tha jo maine uska intezaar kiya…

 


इंतिज़ार शायरी – सब कुछ छोड़ आउंगी इंतिज़ार करो 

खत क्या लिखना सीधे इजहार करो
है अगर अजीज तो दिल लगा के प्यार करो
धड़कन मिट नहीं सकती खत के मजमून से
मैं सब कुछ छोड़ आउंगी बस थोड़ा इंतिज़ार करो…

Intezaar Shayari – Sab kuch chod aaungi intezaar karo 

Khat kya likhna seedhe izhaar karo
Hai agar azeez to dil laga ke pyaar karo
Dhadkan mit nahi khat ke majmoon se
Main sab kuch chod aaungi bas thoda intezaar karo…

 


इंतिज़ार शायरी – इंतिज़ार में तेरे हम मर जायेंगे 

शामों के नजारे जब सड़कों पर झिल मिलाएंगे
ओ मेहबूबा आशिक बन हम तेरी गली में खड़े हो जायेंगे
खिड़की पर आ जाना जैसे ही हम गाना गाएंगे
वरना इंतिज़ार में तेरे हम वहीं मर जायेंगे…

Intezaar Shayari – Intezaar mai tere hum mar jayenge 

Shamo ke nazare jab sadakon par jhil milayenge
Oh mehboooba aashiq ban hum teri gali me khade ho jayenge
Khidki par aa jana jaise hi hum gaana gayenge
Warna tere intezaar mai hum wahi mar jayenge…

 


इंतिज़ार शायरी – मजा है इंतिज़ार में 

मर कर भी तड़पती हूँ तेरे प्यार में
आग लग गई है इस दिले बेकरार में
मिलने में क्या मजा है जो है इंतिज़ार में
दर्द उभरता है कदम रखते ही प्यार में…

Intezaar Shayari – Maza hai intezaar me 

Mar kar bhi tadapti hu tere pyaar me
Aag lag gayi hai is dile bekaraar me
Milne me kya maza hai jo hai intezaar me
Dard ubharta hai kadam rakhte hi pyaar me…

 


इंतिज़ार शायरी – ना खत्म होने वाला इंतिज़ार बाकी है 

वीरानियों से गुजरने के बाद भी
टूटे हुए दिल में आखिरी सलाम बाकी है
उस रास्ते से गुजर रहा हूँ ऐ दोस्त
जहाँ ना खत्म होने वाला इंतिज़ार बाकी है…

Intezaar Shayari – Naa khatam hone wala intezaar baaki hai 

Viraniyon se guzarne ke baad bhi
Toote huye dil me aakhiri salaam baaki hai
Us raaste se guzar raha hoon ae dost
Jahan naa kahatm hone wala intezaar baaki hai…

 


इंतिज़ार शायरी – तमाम उम्र इंतिज़ार किया जिसका 

हाल दिल का सुना नहीं सकते
उस शख्स को हम भुला नहीं सकते
तमाम उम्र इंतिज़ार किया जिसका
वो सामने है तो अब उसको अपना नहीं सकते…

Intezaar Shayari – tamaam umr intezaar kiya jiska 

Haal dil ka suna nahi sakte
Us shaks ko hum bhula nahi sakte
Tamaam umr intezaar kiya jiska
Wo samne hai to ab usko apna nahi sakte…

 


इंतिज़ार शायरी – इंतिज़ार रहता है बस ऐसे मौके का 

क्या पता कब मौत का पैगाम आ जाये
जिंदगी की आखिरी कब शाम हो जाये
मुझे तो इंतिज़ार रहता है बस ऐसे मौके का ऐ दोस्त
की मेरी जिंदगी भी किसी के काम आ जाये…

Intezaar Shayari – Intezaar rehta hai bas aise mauke ka 

Kya pata kab maut ka paigaam aa jaye
Zindgi ki aakhiri kab shaam ho jaye
Mujhe to intezaar rehta hai bas aise mauke ka ae dost
Ki meri zindgi bhi kisi ke kaam aa jaye…

 


इंतिज़ार शायरी – इंतिज़ार में ही पिए जा रहा हूँ 

उम्मीद नहीं है फिर भी जिए जा रहा हूँ
मैं बस उनसे वफ़ा की उम्मीद किये जा रहा हूँ
पता नहीं मुलाकात होगी भी या नहीं
मैं तो बस उनके इंतिज़ार में ही पिए जा रहा हूँ…

Intezaar Shayari – Intezaar me hi piye jaa raha hu 

Ummeed nahi hai fir bhi jiye jaa raha hu
Main bas unse wafa ki ummeed kiye jaa raha hu
Pata nahi mulakaat hogi bhi ya nahi
Main to bas unke intezaar me hi piye jaa raha hu…

 


इंतिज़ार शायरी – काट दी उम्र इंतिज़ार में 

जिल्लत जो उठाई हम ने तेरे प्यार में
की मजनू मुझे कहने लगे सभी बाजार में
और कितनी लेगी अब मेरे प्रेम की परीक्षा
सालों तो काट दी उम्र यूं ही तेरे इंतिज़ार में…

Intezaar Shayari – Kaat di umr intezaar me 

Zillat jo uthai humne tere pyaar me
Ki majnu mujhe kehne lage sabhi bazaar me
Or kitni legi ab mere prem ki pariksha
Salo to kaat di umr yuhi tere intezaar me…

 


इंतिज़ार शायरी – मोहब्बत का लम्बा इंतिज़ार चाहिए 

मुझे तुम्हारा हुस्न नहीं प्यार चाहिए
खूबसूरती नहीं, दिल उदार चाहिए
दिल में चाहत है तेरी, तेरे जिस्म की नहीं
मुझे मोहब्बत का लम्बा इंतिज़ार चाहिए…

Intezaar Shayari – Mohabbat ka lamba intezaar chahiye 

Mujhe tumhara husn nahi pyaar chahiye
Khoobsurti nahi, dil udaar chahiye
Dil me chahat hai teri, tere jism ki nahi
Mujhe mohabbat ka lamba intezaar chahiye…

 


इंतिज़ार शायरी – तमाम उम्र इंतिज़ार किया 

तमाम उम्र इंतिज़ार किया तुम्हारा
पर तुम नहीं आये
अब आये हो तो क्या फायदा
जब हम ही तुमको मिल नहीं पाए…

Intezaar Shayari – Tamaam umr intezaar kiya 

Tamaam umr intezaar kiya tumhara
Par tym nahi aaye
Ab aaye ho to kya fayda
Jab hum hi tumko mil nahi paaye…

 


इंतिज़ार शायरी – इंतिज़ार से मोहब्बत रंग लाती है 

इंतिज़ार करने से मोहब्बत रंग लाती है
इशतहार देने से मोहब्बत खुशबू लाती है
अगर प्यार जवान दिल से हो
तो मोहब्बत भी बहार लाती है…

Intezaar Shayari – Intezaar se mohabbat rang laati hai 

Intezaar karne se mohabbat rang laati hai
Ishathaar dene se mohabbat khushbooo laati hai
Agar pyaar jawaan dil se ho
To mohabbat bhi bahar laati hai…

 


इंतिज़ार शायरी – इंतिज़ार करवा कर क्यों इतना सताती हो 

हर रात ख्वाबों में आती हो तुम
अहसास मोहब्बत का दिलाती हो तुम
ना जाने कब दीदार होगा तुम्हारा
इंतिज़ार करवा कर क्यों इतना सताती हो तुम…

Intezaar Shayari – Intezaar karwa kar kyu itna satati ho 

Har raat khawaon me aati ho tum
Ahsaas mohabbat ka dilati ho tum
Naa jaane kab deedar ho tumhara
Intezaar karwa kar kyu itna satati ho tum…

 


इंतिज़ार शायरी – इंतिज़ार में मैं जीना ही भूल गया 

इतना रहा अँधेरे में की रौशनी भूल गया
इतना रहा गमों में की खुशी भूल गया
जो भी चाहा जिंदगी में मिला कहाँ मुझे
इंतिज़ार में बस उस चाहत की मैं जीना ही भूल गया…

Intezaar Shayari – Intezaar me main jeena hi bhool gaya 

Itna raha andhera me ki roshni bhool gaya
Itna raha gamo me ki khushi bhool gya
Jo bhi chaha zindgi me mila kaha mujhe
Intezaar me bas us chahat ki me jeena hi bhool gaya…

 


इंतिज़ार शायरी – इंतिज़ार कर लेंगे कितना भी 

ना शिकवा है ना शिकायत है
हमें तुमसे केवल मोहब्बत है
इंतिज़ार कर लेंगे कितना भी
दिल में चाहत है हसरत है…

Intezaar Shayari – Intezaar kar lenge kitna bhi 

Na shikwa hai naa shikayat hai
Hame tumse keval mohbbat hai
Intezaar kar lenge kitna bhi
Dil me chahat hai hasrat hai…

 


इंतिज़ार शायरी – सुबह से शाम तक इंतिज़ार रहता है 

एक वो ही है जिस पर हमें सदा ऐतबार रहता है
मेरे दिल मैं और कुछ नहीं बस उसका प्यार रहता है
कभी तो आ कर दिखाएंगे अपना हसीन चेहरा हमको
सुबह से शाम तक बस इसी का इंतिज़ार रहता है…

Intezaar Shayari – Subha se sham tak intezaar rehta hai 

Ek wo hi hai jis par hame sada aetbaar rehta hai
Mere dil me or kuch nahi bas uska pyaar rehta hai
Kabhi to aa kar dikhayenge apna haseen chehra humko
Subha se shaam tak bas isi ka intezaar rehta hai…

 


इंतिज़ार शायरी – इंतिज़ार क्या होता है 

तड़प कर देखो किसी की मोहब्बत में
तब समझ आएगा इंतिज़ार क्या होता है
यूँ ही मिल जाती अगर चाहत किसी की
तो कैसे समझ आता की प्यार क्या होता है…

Intezaar Shayari – Intezaar kya hota hai 

Tadap kar dekho kisi ki mohbbat me
Tab samajh aayega intezaar kya hota hai
Yu hi mil jaati agar chahat kisi ki
To kaise samajh aata ki pyaar kya hota hai…

 


इंतिज़ार शायरी – आज भी तेरे इंतिज़ार में 

कुछ परछाइयां
कुछ सजदे चाहत के
आज भी तेरे इंतिज़ार में
वादियों में तो तुझको ढूढ़ रहे हैं…

Intezaar Shayari – Aaj bhi tere intezaar me 

Kuch parchaiyan
Kuch sajde chahat ke
Aaj bhi tere intezaar me
Wadiyon me tujhko dhoond rahe hai…

 


इंतिज़ार शायरी – इंतिज़ार करवाने में क्या मजा आता है 

एक झलक जो तेरी पाता है, दिल वहीं रुक जाता है
देख कर तेरा रूप सलोना, चाँद भी शर्मा जाता है
मिल भी जाओ अब, इंतिज़ार करवाने में क्या मजा आता है
लौट कर आओगी या नहीं, ये सोच कर मन घबरा जाता है…

Intezaar Shayari – Intezaar me kya maza aata hai 

Ek jhalak jo teri paata hai, dil wahi ruk jata hai
Dekh kar tera roop salona, chand bhi sharma jata hai
Mil bhi jao ab, Intezaar karwane me kya maza aata hai
Laut kar aaogi ya nahi, ye soch kar man ghabra jata hai…

 


इंतिज़ार शायरी – उम्र कट गई उसके इंतिज़ार में 

वो जलती रही शमा की तरह
मैं भी तड़पता रहा उसके प्यार में
मोहब्बत करने का अंजाम भी तो देखो यारों
लैला तो मिली नहीं बस उम्र कट गई उसके इंतिज़ार में…

Intezaar Shayari – Umr kat gai uske intezaar me 

Wo jalti rahi shama ki tarah
Main bhi tadapta raha uske pyaar me
Mohbbat karne ka anzaam bhi to dekho yaaro
Laila to mili nahi bas umr kat gai uske intezaar me…

तो दोस्तों आपको शायरी कैसी लगी नीचे कमेंट करके अवश्य बताइए। इस पोस्ट को शेयर करें और ऐसे ही शायरियाँ पड़ते रहने के लिए हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें।
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