cinnamon in hindi

About Cinnamon in Hindi: भारतीय सभ्यता की शुरुआत आयुर्वेद से हई है और आयुर्वेद में ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जो हमारे घर में ही होती हैं लेकिन हमें उनका ज्ञान नहीं होता है। ऐसी ही चीजों में से एक cinnamon है। Cinnamon को हिंदी में दालचीनी कहते हैं।

दालचीन के नाम से लगभग आप सभी परिचित होंगे क्योंकि दालचीन एक ऐसा मसाला है जिसका उपयोग हर भारतीय घर में किया जाता है। हर भारतीय घर में दालचीन को प्रमुख मसाला माना जाता है। इसलिए दालचीनी को मसालों की रानी भी कहा गया है। इस मसाले का उपयोग केवल खाने का जायका बढ़ाने के लिए ही नहीं किया जाता अपितु यह एक औषधिय मसाला है जिसका उपयोग आयुर्वेदिक और एलोपैथिक दवाओं में भी किया जाता है।

दालचीन के बारे में थोड़ा तो अब सभी जानते हैं लेकिन अधिकतर लोग यह नहीं जानते हैं कि इसके क्या क्या फायदे हैं, इसमें कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं और दालचीनी कितने प्रकार की होती है। इसलिए आज हम आपको दालचीनी से जुड़ी समस्त जानकारी विस्तार से बताने वाले हैं।

 

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दालचीनी क्या है | What is Cinnamon in Hindi

दालचीनी का वैज्ञानिक नाम सिन्नेमोमम वेरुम (Cinnamomum verum) होता है। दालचीनी का पेड़ लौरेसिई (Lauraceae) परिवार से सम्बंधित है। दालचीनी के पेड़ को ट्रू सिनामोन ट्री (true cinnamon tree) कहा जाता है। इसी पेड़ की छाल को निकाल कर सुखाया जाता है। छाल सूखने के बाद गोलाकार बन जाती है जिसको हम सभी दालचीनी के नाम से जानते हैं।

दालचीनी (Cinnamom) का उपयोग कई व्यंजनों में गर्म मसाले के रूप में किया जाता है। इसमें बेहतरीन सुगंध पायी जाती है जो खाने का जायका कई गुणा बड़ा देती है। दिलचस्प बात यह है कि प्रचीन काल में दालचीन का उपयोग कई देशों में मृत शरीर से आने वाली गंध से बचाने के लिए भी किया जाता था। दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट तत्वों के आलावा कई विटामिन्स और खनिज पाए जाये जाते हैं जो सेहत और त्वचा को स्वस्थ बनाने में फायदेमंद हैं। इसी वजह से दालचीनी का उपयोग बिमारियों को ठीक करने में भी होने लगा है।

 

दालचीनी की तासीर :

दालचीनी की तासीर गर्म होती है जो कफ एवं वात रोगों के लिए अत्यधिक फायदेमंद है। दालचीनी का सेवन करने से पहले आपको अपने शरीर की तासीर का ज्ञान होना चाहिए। अतः किसी भी व्यक्ति को अपनी तासीर के मुताबिक ही दालचीनी का सेवन करना चाहिए। गर्म तासीर वाले लोगों को और पित्त की समस्या वाले लोगों को दालचीनी नुकसान पहुँचा सकती है।

 

दालचीन का पेड़ और उसकी पहचान | How did Cinnamon Plant look like

रसोई की शोभा बढ़ाने वाली दालचीनी के पेड़ को कभी भी लगाया जा सकता है। लेकिन यह पेड़ अधिकतर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ही पाया जाता है। यदि दालचीनी के पेड़ की लम्बाई की बात की जाये तो दालचीनी का पेड़ लगभग दस से पंद्रह मीटर तक लम्बा होता है। इस पेड़ की छाल पतली होती है। इस छाल का आकार गोल एवं रंग लाल और भूरा होता है। दालचीनी के फलों में तारपीन के तेल जैसी गंध आती है एवं दालचीनी की पत्तियों को मसलने के बाद उनमे से तीखी गंध आती है। दालचीन पेड़ के फलों का रंग सफ़ेद या हरा होता है। इस पेड़ की पत्तियों की खास बात यह होती है कि इन पत्तियों का उपयोग मच्छरों को भगाने वाले उत्पादों को बनाने में किया जाता है।

 

दालचीनी के प्रकार | Types of Cinnamon in Hindi

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दालचीनी के मुख्यतः चार प्रकार होते हैं। तो आइये दालचीनी के चारों प्रकारों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

 

1. इंडोनेशियन दालचीनी (Indonesian Cinnamon)

इंडोनेशियन दालचीनी को पैडंग कैसिया भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Burmanni है। इस दालचानी का 70 प्रतिशत इंडोनेशिया से ही पूरे विश्व में भेजा जाता है इसलिए इसे इंडोनेशियन दालचीनी कहते हैं। इस दालचीनी का उपयोग भारत में अन्य दालचीनी की तुलना में कम किया जाता है। यह दालचीनी इसके दूसरे प्रकार सीलोन दालचीनी से सस्ती होती है। इंडोनेशियन दालचीनी की छाल मोटी और सुगन्धित होती है।

 

2. सीलोन दालचीनी (Ceylon Cinnamon)

सीलोन दालचीनी को मैक्सिकन दालचीनी भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Zeylanicum है। सीलोन दालचीनी की छाल पतली होती है एवं इस दालचीनी में कूमेरिन की मात्रा सबसे कम पाई जाती है इसलिए सीलोन दालचीनी का उपयोग सर्वाधिक होता है। सीलोन दालचीनी का उपयोग अधिक होने की वजह से यह बाजार में महंगी मिलती है।

 

3. कैसिया दालचीनी (Cassia Cinnamon)

कैसिया दालचीनी को चाइनीज दालचीनी भी कहा जाता है। सका वैज्ञानिक नाम Aromaticum है। कैसिया दालचीनी तीखी और हलकी कड़वी होती है इस वजह से अधिकतर इसका इस्तेमाल दवाइयों में किया जाता है।

 

4. साइगॉन दालचीनी (Saigon Cinnamon)

साइगॉन दालचीनी को वियतनामी कैसिया भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Loureiroi है। यह दालचीन अन्य प्रकार की दालचीन के मुताबिक अधिक सुंगधित होती है इसलिए आजकल इस दालचीनी का भी उपयोग अधिक किया जाने लगा है। साइगॉन दालचीनी में कूमेरिन की मात्रा सबसे ज्यादा पाई जाती है। कूमेरिन की मात्रा के अधिक सेवन करने से यह शरीर के लीवर को खराब कर सकता है। इसलिए साइगॉन दालचीनी का सेवन एक निश्चित मात्रा में ही करना चाहिए।

 

दालचीनी का उत्पादन कहाँ हुआ था | Where did Cinnamon found

संस्कृत के प्राचीन ग्रंथो से ज्ञात होता है कि दालचीन का उपयोग भारत में लगभग हज़ारों वर्षों से किया जा रहा है। लेकिन सबसे पहले दालचीनी कहाँ पाई गई थी इस विषय को लेकर इतिहासकारों के मत अलग अलग हैं। इसलिए दालचीनी की उत्पति सबसे पहले कहाँ हुई इस विषय पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। दालचीन का उपयोग 2000 ईसा पूर्व चीन द्वारा मिस्र देश के लिए निर्यात किया जाता था इसलिए माना जाता है की दालचीनी का सबसे पहले उत्पादन चीन में हुआ था लेकिन कुछ शोधकर्ताओं का मत है की यह तथ्य गलत और भ्रमित है। इसके अतरिक्त कुछ इतिहासकारों का मानना है कि दालचीनी की खोज एक पुतर्गाली ने सबसे पहले श्रीलंका में की थी।

आज के समय में दालचीनी का सर्वाधिक उत्पादन वियतनाम, श्रीलंका, चीन और इंडोनेशिया के साथ-साथ भारत में किया जाता है। दालचीनी दक्षिण भारत का प्रमुख पेड़ है अर्थात भारत में सबसे अधिक दालचीनी का उत्पादन केरल एवं तमिलनाडू में किया जाता है। भारत प्राचीन युग में सबसे अधिक यूरोप, इटली, ग्रीस, मिस्र आदि देशों को दालचीनी का निर्यात करता था।

 

दालचीनी में पाए जाने वाले पोषक तत्व | Nutrients of Cinnamon in Hindi

दालचीनी में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटेशियम, सोडियम, जिंक, विटामिन सी, थियामिन, नियासिन, पैंटोथैनिक एसिड, राइबोफ्लेविन, विटामिन-बी 6, विटामिन-ए, फोलेट, कैरोटीन बीटा, लाइकोपीन, विटामिन ई, कैल्शियम, एंटीओक्सीडेंट ,पौलिफेनोल, मेंगनीज, फ़ाइबर, एंटी इन्फ्लेमेटरी तत्व पाए जाते हैं।

 

दालचीनी के विभिन्न नाम | Some other names of Cinnamon

दालचीनी के विभिन्न प्रकार और पौष्टिक गुणों की भाँति विभिन्न नाम भी हैं। तो आइये आपको दालचीन के विभिन्न नामो से अवगत कराते हैं।

दालचीनी का हिंदी में नाम – दालचीनी, दारुचीनी

दोलचीनी का अंग्रेजी में नाम – सीलोन सिनामोन, सिनैमोन (Cinnamon)

दालचीनी का उर्दू में नाम – दारचीनी

दालचीनी का गुजरात में नाम – दालचीनी या तज

दालचीनी का मराठी में नाम – दालचीनी

दालचीनी का तमिल में नाम – लवंग पत्तै

दालचीनी का संस्कृत में नाम – दारुसिता, चोचम, त्वाक

दालचीनी का तेलुगु में नाम – लवंगमु

दालचीनी का मलयालम में नाम – एरिकोलम

 

दालचीनी के स्वास्थ्यवर्धक फायदे | Benefits of Cinnamon in Hindi

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दोस्तों दालचीनी एक मसाला ही नहीं अपितु यह एक औषधि है जो कि स्वास्थवर्धक है। दालचीनी का उपयोग हम सभी खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए करते हैं लेकिन इसके स्वास्थवर्धक क्या फायदे हैं इनसे अब तक कई लोग अनजान हैं। इसलिए चलिए अब आपको दालचीनी के फायदों से रूबरू करवाते हैं।

 

1. दालचीनी बनाता है ह्रदय को स्वस्थ

अत्यधिक बड़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल ह्रदय को कई रोगों से ग्रस्त बना देता है इसलिए ह्रदय को स्वस्थ बनाये रखने के लिए कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखना बेहद जरुरी है। दालचीनी में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो LDL अर्थात खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके हदय को स्वस्थ बनाते हैं। दालचीनी में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण पाए जाते हैं जो ह्रदय की सूजन को कम करते हैं। दालचीन और शहद को मिलाकर लेने से ह्रदय से सम्बंधित हाई ट्राइग्लिसराइड, हाई ब्लड प्रेशर जैसी कई समस्यायों को दूर किया जा सकता है।

 

2. शरीर की सूजन को कम करे दालचीनी

अक्सर कई बार खट्टी चीजों का सेवन करने से शरीर में सूजन आ जाती है। सूजन को कम करने के लिए हम गर्म पानी और दवाइयों का सहारा लेते हैं। लेकिन बता दें कि सूजन को कम करने के लिए आप दालचीनी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। दालचीनी में फ्लेवोनोइड यौगिक और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण पाए जाते हैं जो सूजन को कम करते हैं। दालचीनी के पाउडर को पानी में मिलाकर लेप लगाने से शरीर के किसी भी अंग में चोट की वजह से आई सूजन भी कम होती है।

 

3. दालचीनी के इस्तेमाल से ब्लड शुगर को करें कम

शरीर में ब्लड शुगर की मात्रा अधिक होने से डायबिटीज रोग होता है अतः शरीर में शुगर की मात्रा को कम करके डायबिटीज रोग पर नियंत्रण किया जाता है। दालचीनी में पॉलीफेनॉल्स सीरम पाया जाता है जो रक्त में शकरा और इंसुलिन का प्रभाव कम करता है जिसकी वजह से डायबिटीज के रोगियों को फायदा पहुँचता है। दालचीनी में एंटी डायबिटिक गुण भी पाए जाते हैं जो ब्लड शुगर को कम करते हैं।

 

4. बैक्ट्रिया के संक्रमण और फंगल इन्फेक्शन को रोके दालचीनी

दालचीनी एक बेहतरीन औषधिय मसाला है यह न सिर्फ कई बीमारियों को कम करता है बल्कि मानव शरीर को कई बैक्टीरियाओं से संक्रमित होने से भी बचाता है। दलअसल दालचीनी में एंटीबायोटिक, एंटीवायरल, एंटी-माइक्रोबियल (सूक्ष्मजीवरोधी) तत्व पाए जाते हैं। अतः यह तत्व शरीर पर मौजूद बेक्टीरिया के संक्रमण को ख़त्म करते हैं एवं दूसरे बैक्टीरिया को होने से रोकता हैं। दालचीनी में एंटी-फंगल तत्व भी पाया जाता है यह तत्व फंगल इन्फेक्शन को कम करने में मदद करता है।

 

5. दालचीनी से करें चर्बी को कम

दालचीन का उपयोग अक्सर मोटापा को कम करने के लिए किया जाता है। दालचीनी में विटामिन सी और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। बता दें कि फाइबर और विटामिन सी का ज्यादातर उपयोग वजन कम करने के लिए किया जाता है। प्रतिदिन सुबह खाली पेट शहद के साथ एक छोटी चम्मच दालचीनी पाउडर का सेवन करने से अतिरिक्त चर्बी घटकर मोटापा जल्दी कम होता है।

 

6. दालचीन से कैंसर होने की सम्भवना होगी कम

दालचीन कई प्रकार के कैंसर रोग को रोकने में कारगार औषधि है। दालचीनी में कीमोप्रेंटिव गुण पाया जाता है जो कैंसर की कोशिकाओं के विकास को और कैंसर कोशिकाओं को फैलने से रोकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक दालचीनी में एंटी कैंसर, एंटी-ऑक्सीडेंट और इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं यह तत्व ट्यूमर कैंसर जैसी कई समस्याओं को प्रभावी तरीके से काभी हद तक कम करते हैं।

 

7. दालचीनी जोड़ों के दर्द में दे राहत

दालचीनी में कैल्शियम, मैग्नीशियम आयरन एवं प्रोटीन जैसे गुणकारी तत्व पाए जाते हैं जो जोड़ो के दर्द और गठिया के रोग में फायदेमंद होते हैं। यदि आप गठिया और जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो दालचीनी का उपयोग आपके लिए बेहद लाभकारी रहेगा। प्रतिदिन सुबह शाम दालचीनी का सेवन दूध या शहद के साथ करने से जोड़ों में होने वाले दर्द या गठिया वाय के दर्द में आराम मिलता है।

 

8. दालचीनी श्वसन संबंधी रोग में है लाभकारी

श्वसन सम्बन्धी बीमारी फेफड़ों से सम्बंधित होती है। जब फेफड़ों के अंदर पाई जाने वाली श्वसन नली में सूजन आ जाती है या कोई इन्फेक्शन हो जाता है तब किसी भी व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। कई बार यह बीमारी अस्थमा का रूप भी ले लेती है। दालचीनी में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो अंदर होने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करके फेफड़ों को इन्फेक्शन और सूजन से बचाते हैं। अतः एक गिलास दूध, कॉफी या ग्रीन टी में एक चौथाई चम्मच दालचीनी मिलाकर उपयोग करने से श्वसन सम्बन्धी रोग कम हो सकते हैं।

 

9. दालचीनी बनाये दिमाग को स्वस्थ और कार्यशील

दालचीनी केवल शारीरिक रोगों को ही दूर नहीं करती है बल्कि मानसिक रोगों को भी दूर करने का काम करती है। अक्सर हमारा दिमाग या मस्तिष्क तनाव से ग्रस्त रहता है इसलिए स्वस्थ मस्तिष्क बनाने के लिए सबसे पहले दिमाग को तनाव से मुक्त होना जरुरी है। दालचीनी में फाइबर, फाइटोकेमिकल्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो होने वाले तनाव को दूर कर मस्तिष्क को कार्यशील बनाते हैं। बता दें कि दालचीनी एक हद तक याददाश्त को बढ़ाने का भी काम करती है। अतः दालचीनीन के इस्तेमाल से दिमाग को पूरी तरह स्वस्थ रखा जा सकता है।

 

10. दालचीनी त्वचा का रखे ख्याल

दालचीनी का अधिकतर उपयोग त्वचा को स्वस्थ रखने वाली आयर्वेदिक दवाइयों में किया जाता है। दालचीनी के उपयोग से शरीर की त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाया जाता है। दालचीनी में पाए जाने वाले गुण त्वचा पर होने वाले मुहांसो, दाग-धब्बों तथा सनबर्न जैसे कई समस्याओं को कम करते हैं। दालचीनी पाउडर, शहद और नींबू से तैयार मिश्रण को चेहरे पर लगाने से मुहांसों और दाग-धब्बों की समस्या में आराम मिलता है।

 

11. दालचीनी से बनाये पेट और पाचन तंत्र को स्वस्थ

दालचीनी पेट और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करती है। जैसा की ऊपर बताया दालचीनी में फाइबर, एंटी-बैक्टीरियल और माइक्रोबियल तत्व पाए जाते हैं तो यह तत्व पेट और पाचन तंत्र को खराब करने वाले बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं। यदि आप अपने पाचन तंत्र को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो दालचीनी का सेवन आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

 

12. दालचीनी से बनाये फौलादी हड्डियां

आजकल काम की अधिकता एवं खान पान ठीक से ना हो पाने के कारण अधिकार लोगो को हड्डियों से सम्बंधित कई परेशानियाँ होती हैं। बता दें कि दालचीनी में कैल्शियम एवं मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है साथ ही हड्डियों के दर्द को भी दूर करने में मदद करता है। दालचीनी के तेल की मालिस से सभी प्रकार के दर्द में रहत मिलती है।

नोट – दालचीनी का सेवन किसी भी बीमारी का पूर्णतः इलाज नहीं है अपितु दालचीनी के उपयोग और सेवन से बीमारियों को कम किया जा सकता है।

 

दालचीनी के अन्य फायदे | Some Other Benefits of Cinnamon in Hindi

1. खाने के व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाने में दालचीनी बहुत ही उपयोगी है।

2. मुंह से आने वाली बदबू को दूर करने के लिए गर्म पानी में एक चुटकी दालचीनी मिलाकर कुल्ला करने से मुंह की बदबू दूर हो जाती है।

3. दांत या दाढ़ में दर्द होने पर दालचीनी के तेल की दांतो पर मालिश करें।

4. सर्दी में बुखार आने पर दूध में दालचीनी डालकर पीने से फायदा मिलता है।

5. सर्दी खांसी में दालचीनी के सेवन से आराम मिलता है।

6. मासिक धर्म नहीं आने पर दालचीनी लेने से लाभ मिलता है।

7. दालचीनी से महिलाओं के स्तन में दूध बढ़ता है।

8. दालचीनी त्वचा को सुन्दर कोमल बनाता है। अधिक उम्र होने से होने वाली झुर्रियों में भी लाभदायक है।

9. दालचीनी से बालों को काले घने लम्बे एवं चमकदार बनाया जा सकता है।

10. दालचीनी बालों में होने वाली रुसी को कम करती है।

11. दालचीनी के सेवन से याददाश्त तेज होती है।

 

दालचीनी का उपयोग कैसे करें | How to use Cinnamon in Hindi

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दालचीनी के बहुमूल्य गुणों की वजह से इसके अनेक फायदे हैं और इन फायदों में दालचीनी का उपयोग कई प्रकार से किया जा सकता है। जैसे दालचीनी दूध, दालचीनी चाय, दालचीनी शहद, दालचीनी पाउडर, दालचीनी सूप, दालचीनी तेल और दालचीनी कॉफी के रूप में आप इसका उपयोग कर सकते हैं। दालचीनी को पानी में उबालकर इससे गरारे करने से गले तथा मुंह से सम्बन्धी सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। दालचीनी का गरम मसाले के रूप में व्यंजनों को स्वादिष्ट बनाने के लिए सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।

 

दालचीनी का उपयोग कब और कितना करें | When to use Cinnamon

दालचीनी कोई टेबलेट नहीं है जिसे डॉक्टर खाना खाने के बाद या खाना खाने के पहले लेने की सलाह देते हैं। यह तो घरेलु औषधि है जिसे आप अपने खाने की चीजों के साथ अपनी सुविधा के अनुसार ले सकते है। दालचीनी का उपयोग सुबह चाय में, दोपहर खाने में या शाम को सूप में डालकर कर सकते है। यदि आप दालचीनी दूध के साथ लेना चाहते हैं तो इसका उपयोग रात को कर सकते हैं क्योंकि दालचीनी के दूध से अच्छी नींद आती है।

 

दालचीनी से होने वाले नुकसान | Side Effects of Cinnamon in Hindi

दालचीनी से होने वाले नुकसान की जानकारी अवश्य होनी चाहिए क्योंकि जहाँ दालचीनी के कई फायदे हैं वहीं दालचीनी के कुछ नुकसान भी हैं। तो आइये दालचीनी से होने वाले नुकसानों को भी जान लेते हैं।

1. महिलाओं को गर्भ के समय दालचीनी का उपयोग हरगिज नहीं करना चाहिए क्योंकि दालचीनी की तासीर गर्म होती हैं इस कारण इसका सेवन करने से गर्भ खराब होने या प्रसव जल्दी हो जाने का डर रहता है।

2. जिन लोगों को एसिडिटी की समस्या है उनको दालचीनी का सेवन नहीं करना चाहिए।

3. दालचीनी का अधिक मात्रा में सेवन करने से लीवर खराब हो सकता है।

4. दालचीनी गर्म होने के कारण अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से कई तरह की एलर्जी हो सकती हैं।

5. खून को पतला करने के लिए दालचीनी का सेवन नहीं करने चाहिए क्योंकि जिस मात्रा में खून पतला होता है दालचीनी उस मात्रा में खून को पतला नहीं करती है।

 

तो दोस्तों ये थी दालचीनी (Cinnamon in hindi) से जुड़ी कुछ जानकारी। हम आशा करते हैं की आप दालचीनी के समस्त फायदे और नुकसानों से परिचित हो गए होंगे। अगर आपको हमारी यह जानकारी पसंद आई हो तो इसे अपने दोस्तों के बीच शेयर जरूर करें और ऐसी ही जानकारी पड़ते रहने के लिए हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें।
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